Train Me Chandal Chaukadi Ke Karname-1
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भतीजी ने जीते जी स्वर्ग दिखाया
नमस्कार दोस्तो,
मैं आपका किशोर एक बार फ़िर हाज़िर हूँ नये अनुभव के साथ ! मैं कितना ठरकी हूँ आप जानते ही हैं।
यह कहानी मेरी भतीजी के साथ यौन सम्भोग की है, वो मेरी दूर की भतीजी है जिसे मैंने उसकी शादी के बाद चोदा!
मेरी भतीजी का नाम सुमन है, वह राजस्थान में हनुमानगढ़ में रहती है। उसकी फिगर को देखकर कोई भी उस पर मर मिट सकता है, इतना मस्त फिगर है उसका 34-30-36, रंग एकदम गोरा है लम्बाई 5’5″ है, पेट बिल्कुल अंदर की ओर धंसा है और इतनी कामुक अदायें हैं कि पूछो ही मत… बाल काले और चूतड़ों से नीचे तक लम्बे हैं।
मैं भी बांका खूबसूरत हूँ और 5’8″ लम्बा जवान हूँ, मेरी उम्र इस समय 29 है।
अब सीधे कहानी पर आता हूँ !
सुमन को मैं पहली बार आज से सात वर्ष पहले किसी शादी में मिला था, उस समय मैं 22 साल का था और वो 18 साल की कमसिन हसीना थी। उसे देखते ही मेरी नज़र उस पर आ गई थी, मुझे वो बेहद पसंद आई और वो भी बार बार मुझे ही देख रही थी!
हमारी आपस में बार-बार निगाह मिल रही थी पर हम शादी के अपने अपने काम में लगे हुए थे, मैं तो उससे शादी के सपने संजोने लगा था!
मेरे चाचा जी की लड़की की शादी थी, उन्हीं दीदी ने मुझे किसी काम से बुलाया। वो भी वहीं आ गई, हम एक दूसरे की आँखों में देख कर मुस्करा दिये पर हम पर बिजली तब गिरी जब उसने (दीदी ने) हमारा परिचय कराते हुए बताया कि वो मेरी दूर की भतीजी लगती है!
हम ऐसे हो गये थे कि ‘काटो तो खून नही!’
खैर दीदी ने कुछ काम बताया, छत वाले कमरे में से कुछ लाना था, तो मैंने जाते समय उसे इशारा किया तो वो भी मेरे पीछे पीछे आ गई।
ऊपर वाले कमरे में किस्मत से कोई नहीं था, उसने आते ही मुझे छेड़ा- बोलो चाचा जी?
मैंने उसका हाथ पकड़ा और बोला- सुमन, मैं नहीं जानता क्या सही है, पर तुम्हें देखते ही प्यार करने लगा हूँ।
वो बोली- प्यार तो मुझे भी है, पर आप मेरे चाचा हो।
मैंने कहा- तो क्या हुआ… प्यार होते समय हमें पता नहीं था, हम अब भी प्यार कर सकते हैं।
उसने अपनी गरदन झुका ली और कुछ नहीं बोली!
मैंने उसे अपनी बाँहों के घेरे में जकड़ लिया। उस समय उसने पंजाबी सूट पहन रखा था! गुलाबी सूट में वो गुलाब का फूल लग रही थी!
मेरी बांहों में वो मोम की तरह पिघलने लगी थी, हम एक दूसरे की आँखों में खो गये थे, पता नहीं कब मेरे लबों ने उसके मुलायम लबों को अपने अंदर समा लिया।
अचानक ही किसी के कदमों की आहट ने हमें अलग कर दिया पर अब तक हम एक दूसरे के हो चुके थे।फ़िर हम दीदी का लहंगा अलमारी से निकाल कर अलग अलग नीचे चले गये!
मैं वहाँ 4-5 दिन और रहा, हम पूरा दिन मस्ती करते रहते! जब भी मौका मिलता हम एक हो जाते और चुम्बन लेते! मैं उसके खूबसूरत गोल, सफेद, बड़े-बड़े उभारों को दबा देता या मौका मिलने पर एक दो बार चूस भी लिया था, पर इससे ज्यादा करने का मौका ही नहीं मिला।
एक दिन तो मेरी बड़ी सगी बहन (जो मेरे साथ आई थी) ने हमें चुम्बन लेते देख लिया पर बोली कुछ भी नहीं!
फ़िर हम घर आ गये पर मैं महीने में एक बार उसके शहर ज़रूर जाता था और उससे किसी रेस्तरां में मिलता था!
पर हमें सम्भोग सुख ना मिला!
इसी तरह पांच साल निकल गये और मेरी शादी हो गई पर मेरे मन से उस से सम्भोग की इच्छा नहीं ख़त्म हुई और अब तक तो मैं पूरा ठरकी बन गया था!
अब हम दोनों पति पत्नी कुछ महीने पहले, मेरी पत्नी के ननिहाल चुरू गये हुए थे, तो मुझे पता चला कि सुमन की शादी भी यहीं हुई है।
मेरे बारे में सुनते ही वो भी दौड़ी चली आई और मेरी धड़कनें बढ़ चली थी, मन बल्लियों उछल रहा था!
जब मेरी जान मेरे सामने आई तो, मैं तो खड़े खड़े फनाह हो चला था!
क्या रूप निकल आया था!
जैसा हमारे रिवाज़ है, उसने साड़ी पहन रखी थी ! क्या सितम ढा रही थी उसकी जवानी… काली साड़ी कमर से नीचे बँधी थी उसकी नाभि दिख रही थी, नितम्बों का उभार बढ़ गया था, उसका एकदम दूधिया सफेद बदन काली साड़ी में चमक रहा था, स्तन और भी बड़े हो गए थे, ब्लाउज भी डीप कट था… आआआह्हह… जो उसके स्तनों की घाटी को स्पष्ट दिखा रहा था।
उसकी पतली कमर लचक लचक जा रही थी… उसे देखते ही लन्ड महाराज खड़े हो गये थे जिसे मैंने बड़ी मुश्किल से छुपाया था। उसका गोरी कमर और पेट मुझे मदहोश कर रही थी उसका गोरा वक्ष स्थल मुझे पागल कर रह था… आआआह्हह…
खैर उसने मुझे और मेरी पत्नी को रात्रिभोज पर बुलाया और मैंने झट से हाँ कर ली हालाँकि मेरी पत्नी सहमत नहीं थी क्योंकि वो अपने माता पिता और परिवार के साथ रहना चाह रही थी।
शाम को मेरी पत्नी ने जाने से मना कर दिया था पर मैंने जाना ठीक समझा और मन ही मन अपनी पत्नी को धन्यवाद दिया!
उसका घर बहुत ही सुंदर और उसकी तरह ही सलीके से सज़ा हुआ था।
मुझे जाने पर पता चला वो दोनों ही बस पति पत्नी थे घर पर… बच्चा उसे कोई हुआ नहीं था और सास ससुर उसके पोते की मन्नत ले कर तीर्थ पर गये थे!
उसके पति रमेश ने मेरी अच्छी आवभगत की थी, वो पर वो शराबी था मुझे बाद में पता चला!
रमेश ने मेरे साथ भोजन नहीं किया।
मेरे भोजन करने के बाद दोनों ने मुझे रात को रुकने का आग्रह किया।
मैं तो यही चाहता था, मैंने अपनी पत्नी को फोन करके बता दिया।
हम लोग बरामदे में बैठे थे, इसके साथ ही रसोई थी।
थोड़ी देर में रमेश बोला- चाचा जी, मैं अभी आता हूँ!
और चला गया!
सुमन जान बोली- चले गये शराब पीने!
और उदास होकर बोली- रोज़ बहुत ज्यादा शराब पीते हैं।
वो रसोई में चली गई।
मैं तो पहले ही मौके पे चौके का उस्ताद हूँ, धीरे से उसके पीछे पीछे रसोई में चला गया।
वो मेरी तरफ़ पीठ करके खड़ी थी, क्या चूतड़ थे दोस्तो !
मैंने पीछे जाकर उसकी चिकनी सफेद कमर पर अपने दोनों हाथ बढ़ा दिये, मेरे हाथ फिसल कर आगे पेट की तरफ़ बढ़ गये!
क्या मुलायम और चिकना पेट था, बता नहीं सकता!
मैं उसके पीछे बिल्कुल सट कर खड़ा था और मेर लिंग उसकी गांड को छू रहा था।
मेरे होंठों ने उसकी गरदन को अपनी गर्मी देनी शुरू कर दी थी… उमम्म हह!
अब वो भी पीछे हट गई, उसका गोरा, कामुक गर्म बदन मेरे बदन से चिपक गया था, वो पिंघल कर मेरे अंदर अंदर समा जाना चाहती थी!
हमारी वर्षों की तमन्ना पूरी हो रही थी!
मेरा एक हाथ उसके मुलायम पेट को सहला रहा था, उसकी नाभि से खेल रहा था और दूसरा हाथ उसके बड़े वक्ष को मसल रहा था।
मैं अपना हाथ उसके डीप कट बलाउज में डालकर उसके एक उरोज बूब को मसलने लगा… कितना मखमली अहसास था आआ आह्हह!
अब वो भी काम वेग से बोझिल हो रही थी, अपना सारा वजन मुझ पर डाल रही थी, मेरे होंठ अब भी उसके कान से होते हुए उसके पीछे गरदन और बड़ी गले की ब्लाऊज से पीठ पर घूम रहे थे, उसके दोनों हाथ मुझे कमर के पास से पकड़ कर खींच रहे थे, उसकी आँखें बँद हो चली थी और वह अपने होंठों काट रही थी।
मेरा लिंग कपड़ों को चीर कर उसमें घुसने की नाकाम कोशिश कर रहा था!
मैंने उसकी साड़ी को पीछे से ऊपर उठा दिया, देखा कि उसने पेंटी नहीं पहनी थी, मेरी पेंट की जीप खोल कर मैंने लिंग उसके चूतड़ों की दरार में चिपका दिया।
मेरे लिंग की गर्मी उसे पागल कर रही थी।
इसके साथ ही मैंने दायें हाथ से उसके आगे की साड़ी उठाई और उसकी चूत पर हाथ लगाया।
‘ऊम्म्म्म आअह ह्हह…’ क्या मुलायम फूली हुई क्लीन शेव चूत थी, मेरी पयारी सेक्सी भतीजी की चिकनी चूत बिल्कुल गीली हो चुकी थी और उसका रस जांघों पर फैलने लगा था!
अब वो एकदम पलटी और उसका मुँह मेरे मुँह के बिल्कुल सामने था, उसकी आँखें वासना से लाल हो चुकी थी, लबों से रस टपक कर आने को आतुर लग रहा था, उसका चेहरा गुलाबी हो गया था, ऐसा लग रहा था कि दूध में केसर उढ़ेल दिया हो।
उसके कामुक जिस्म की मादक खुशबू ने मुझे पागल कर दिया था, अब मेरे लबों ने उसके लबों को चूसना शुरू कर दिया, उसकी जीभ मेरे मुँह में आ गई जो मिश्री सा मीठा स्वाद दे रही थी।
मेरे दोनो हाथ उस कामदेवी का चेहरा थामे हुए थे कि अचानक उसके पति के लड़खड़ाते कदमों की आहट हुई और हम अलग हो गये। रमेश लडखड़ाते हुए रसोई में आया।
‘आ गये आप? चाचाजी बैठे बोर हो रहे थे तो किचन में आ गये बात करने!’
यह सुमन की आवाज़ थी।
फ़िर हम वापिस बरामदे में आ गये, रमेश ने जैसे तेसे खाना खाया और सोने चला गया।
हम फ़िर अकेले हो गये, उसने मेरा बिस्तर अपने ससुर के कमरे में लगाया जहाँ दो सिंगल बेड पड़े थे, जिसमें से एक मुझे दिया।
यह कमरा उसके कमरे से लगभग सामने था।
मैं फ़िर उसके नज़दीक जाने लगा तो उसने मना कर दिया, बोली- चाचा जान, ना छेड़ करो, थोड़ा सब्र करो, फ़िर मैं आपकी ही हूँ!
अब तो एक एक पल एक साल सा गुजर रहा था।
फ़िर उसने बर्तन साफ किए और बाकी काम करके अपने कमरे में चली गई।
करीब एक घंटे के बाद वो मेरे कमरे में आई और बताया कि उसका पति रात में दो बजे से पहले कभी नहीं उठता। और फ़िर भी वह बाहर से कुंडी लगा आई है!
वो नहा कर आई थी, गुलाबी बदन पर उसने पर्पल नाईटी पहनी थी, क्या कयामत लग रही थी!
मैं तो पहले ही अपने कपड़े उतार कर सिर्फ अंडरवियर में था।
वो तो जैसे कामवासना की अग्नि में जल रही थी, उसने अंदर से कुंडी लगा दी और सीधे मेरे ऊपर लेट गई थी, उसकी चूत को मेरा लन्ड रगड़ रहा था।
उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी, उसके हाथ मेरे सिर को सहला रहे थे!
उसका पूरा शरीर तप रहा था।
अब उसने अपनी नाईटी भी उतार कर फैंक दी थी, वो बिल्कुल नंगी मेरे सामने खड़ी थी।
उस वक़्त अगर कोई मुझे स्वर्ग दे तो उस अप्सरा के लिए मैं वो भी ठुकरा दूँ!
वो मेरे घुटनों के पास ही बेड पर ही खड़ी थी, ऐसे एल.ई.डी. सी चमक रही थी वो… उम्म्म्म आआआह्हह!
अब वो फ़िर से मेरे ऊपर लेट गई और हमने 5 मिनट तक एक दूसरे की जीभ को रगड़ा, मेरे हाथ उसकी पीठ को सहला रहे थे!
अब मैंने उसको ऊपर से अपनी दाईं तरफ़ लुढका दिया और फ़िर उसके ऊपर आ गया।
फ़िर मैंने उसके पैरों के बीच बैठ कर उसके दोनो पैरों को अपनी कमर के दोनों तरफ़ से निकाल लिया।
अब मैं मेरे अंडरवीयर के छेद में से लन्ड निकल कर उसकी चूत पर रगड़ने लगा और दोनो हाथों से उसके बूब्स दबाने लगा!
अब वो ‘आह्ह्ह आम्मम्म एउउउईई आह्ह्ह्ह्ह…’ करने लगी पर मैं कोई जल्दी नहीं करना चाहता था।
मैं 4-5 मिनट तक में उसके पेट, कंधे, बूब्स उसकी बगलों पर अपने हाथ घुमाता रहा और वो ‘आअह्ह हह्हह ऊम्म्म आअह्ह ह्हह्हह’ करती रही।
अब मैंने उसे पलट दिया और उसकी पूरी पीठ को सहलाते हुए कभी चाट रहा था तो कभी काट रहा था।
उसकी सिसकारियाँ बढ़ गई थी।
फ़िर मैंने उसके कूल्हों, जांघों और पैरों को भी चाटा। बिल्कुल चिकनी और सफेद टांगें थी उसकी!
अब मैंने उसे फ़िर पलटा, वो सीधी हो गई, इतनी मस्त लग रही थी कि मन कर रहा था कि बस खुद में उतार लूँ…
खैर वो ‘आआह्ह ह्ह्ह्ह ऊम्म्म आआऊऊऊच इम्म्म्म उह हुहुह्ह…’ किये जा रही थी, उसकी चूत लगातार टपक रही थी।
अब मैंने उसको माथे पर चूमा और बड़ी काली आँखों, तीखे नाक भरे और गुलाबी सफेद गाह्ल लम्बी गोरी गर्दन, कंधों को सहलाते हुए चाट गया था!
अब मैंने उसके स्तनों को चूसना, चाटना शुरू किया जिससे उसकी सिसकारियाँ तेज हो गई, जिस्म अकड़ने लगा, उसकी गर्दन पीछे को मुड़ गई, सीना तन गया… उसके हाथ कभी बेड शीट को पकड़ते तो कभी मेरे बालों को सहलाते, कभी मेरी पीठ को नोचते!
उधर मैं एक हाथ से उसके बड़े स्तन को मसल रहा था, दूसरे हाथ से चूत के ऊपर छोटे से दाने को रगड़ रहा था, मेरा लन्ड चूत के निचले हिस्से को घिस रहा था।
फ़िर मैंने उसके पेट को दबाया, सहलाया और चाट लिया!
फ़िर मेरा मुँह उसकी चूत को चाटने लगा, अब वो बहुत जोर से सिसक उठी और ढेर सारा पानी बह निकला जिसे मैंने सारा चाट लिया था।
अब मैं उसके पैरों की तरफ़ लेट गया और उसके पैरों को चाटते हुए उसकी चूत की तरफ़ बढ़ने लगा।
वो बोली- जान अकेले ही मजे लेते रहोगे?
और मुझे चित लेटा कर अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दी और मेर लन्ड को लॉलीपॉप बना कर चूसने लगी।
अब मेरा भी छुटने वाला था, हम दोनों ‘आआह्हह आअह्ह ह्हह्हह आह्ह ह्ह्ह उह हूउ ह्ह्ह्ह’ कर रहे थे।
मैंने अपना पानी छोड़ दिया और वो सारा गटक गई, फ़िर बोली- मेरे दिल के राजा, आ जा मेरी प्यास बुझा… मुझे और ना तड़फा!
मैं बोला- तुम खुद कर लो!
फ़िर उसने मेरे अंडरवियर को उतारा क्योंकि अब तक लन्ड अंडरवीयर के छेद से ही निकला हुआ था। कुछ देर मेरे मुरझाए लन्ड को चूस कर उसमें जान डाली और वो मेरे 6″ लम्बे लन्ड पर बैठी और घुटने मोड़ कर हिलने लगी, उसके हाथ मेरी छाती पर थे और मेरे हाथ उसके चूचों को मसल रहे थे।
करीब 5-7 मिनट में वो निढाल हो गई, बोली- हो गया!
अब मैंने उसे नीचे लिटाया और बीच में आकर उसके पैरों को अपने कंधों पर रखा और उसकी चूत में अपना लन्ड डाला और धक्के मारने लगा।
वो फ़िर ‘आह्ह ह्ह्ह्ह आह ह्ह्ह ऊऊ ऊम्म्म्म्म माआआह्ह्ह ह्ह्ह…’ करने लगी।
‘आअह्ह ह्हह्हह उम्म्म्म्हह्ह…’ के साथ उसकी चूत में मैंने अपना लावा छोड़ दिया और कुछ देर हम उसी पोजिशन में रहे।
अब मैं और मेरी दिलरुबा भतीजी साथ साथ लेटे, उसने कहा- जान, जिंदगी में पहली बार मैंने इतना परम आनन्द पाया है।
हमने समय देखा, एक बज गया था, वो खड़ी होकर कपड़े पहनने लगी तो मैंने रोका और उसकी कुछ तस्वीरें ली फ़िर वो कपड़े पहन कर अपने पति के साथ सो गई और मैं अकेला रह गया।
अगले दिन वो बहुत खुश थी और मैं मेरी पत्नी के साथ वापिस आ गया।
फ़िर कुछ दिन बाद उसकी काल आई और बताया कि वो गर्भवती है और बच्चा मेरा है।
यह था मेरा और उसकी सात साल की तपस्या का फल !
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माँ और ताउजी की खेत में चुदाई
मैं इस साईट की लगभग सारी कहानियाँ पढ़ता हूँ। मुझे सारी कहानियाँ बेहद ही अच्छी लगी। उनको पढने के बाद मैं आपके लिये एक ऐसी कहानी लाया हूँ जिसे मैंने अपनी आँखों के सामने होते हुये देखा था। इससे पहले कि मैं अपनी कहानी को शुरु करूँ, सबसे पहले मैं उन दोनों लोगों का परिचय आपसे करा दूँ।
इस कहानी में दो लोग- कोई और नहीं एक मेरी माँ और दूसरा एक इन्सान मेरे ताऊ जी जिसकी उमर साठ साल की है। यह कहानी वैसे तो कुछ पुरानी है लेकिन मेरे सामने जब भी वो दिन याद आता है तो मुझे ऐसा लगता है कि यह कल की ही बात है। मेरा नाम राज है हमांरे परिवार में मैं, माँ और पापा हैं। मेरे पापा सेल्समैन हैं, वो कई कई दिनो तक बाहर रहते हैं…।
वैसे भी हमांरे सारे सम्बन्धी गांव में रहते हैं, हम साल में दो या तीन बार जाते हैं। वहाँ हमांरे ताऊ जी रहते हैं, उनकि पत्नी की मौत के बाद वो अकेले ही रहते हैं। हम नवरात्रि में गाँव जाने वाले थे। पापा भी आने वाले थे लेकिन उनको कुछ काम आ गया तब उन्होंने हम दोनों को गांव जाने के लिये कहा।
माँ ने कहा- ठीक है।
तब मैंने देखा कि माँ खुश थी और पैकिंग करने लगी। हम लोग सुबह की ट्रेन से गाँव पहुँच गये। वहाँ ताऊ जी हमें लेने के लिये आये हुये थे। माँ उनको देख कर खुश हो गई और ताऊ जी भी खुश हुए, उन्होने पूछा- परिमल नहीं आया?
माँ ने कहा- उनको कुछ काम आ पड़ा है, वो दो तीन दिन बाद आयेंगे।
और ताऊ जी माँ को देखते रहे और माँ भी उनको देखते रही। मुझे कुछ दाल में काला नजर आया …
हम लोग बैलगाड़ी में बैठे और ताऊ जी ने मुझे कहा- तुम चलाओ।
मैंने कहा- ठीक है।
माँ और ताऊ जी पीछे बैठ गये। थोड़ी दूर चलने के बाद मैंने माँ की आवाज़ सुनी, पीछे देखा तो ताऊ जी का पैर माँ के साये में था और माँ ने मुझ से कहा कि सामने देख कर चलो।
हमें लोग घर पहुंचे तब माँ बाथरूम में चली गई और थोड़ी देर बाद बाहर आई……।।
ताऊ जी ने कहा- चलो, तुमको खेत में ले चलता हूँ।
माँ मुस्कुराते हुए बोली- हाँ चलिये।
मैं भी साथ था। हम लोग खेत में पहुँचे तो मैंने ताऊ को जी माँ की गाण्ड पर हाथ फिराते हुए देखा।
तब माँ ने कहा- लड़का इधर है, वो देख लेगा।
उनको पता नहीं था कि मैंने देख लिया था।
तब ताऊ जी ने मुझसे कहा- बेटा, तुम दूर जा कर खेलो। मुझे तुम्हारी माँ से बातें करनी हैं।
तो मैंने माँ को देखा तो माँ ताऊ जी के सामने देख कर मुस्कुरा रही थी और मुझे कहा कि तुम यहाँ से जाओ……।
मैं वहाँ से चलने लगा और माँ-ताऊ जी भी खेत के अन्दर दूर जाने लगे। मुझे दाल में काला नज़र आया। मैं भी उनके पीछे पीछे गया तो देखा कि ताऊ जी माँ की दोनों एक पेड़ की आड़ में चले गये और माँ पेड़ से लग कर खड़ी हो गई। अब ताऊ जी अपना हाथ माँ के साये में डालने लगे और माँ भी अपना साया उठा कर उनका साथ देने लगी। लेकिन मुझे उनकी कोई भी बातें सुनाई नहीं दे रही थी, इसलिये मैं और नज़दीक गया और सुनने लगा। तब वो दोनो पापा की बातें कर रहे थे।
माँ कह रही थी- कितने दिन बाद मुझे यह तगड़ा लौड़ा मिल रहा है, वरना परिमल का लौड़ा तो बेकार है।
अब माँ के बुर को दोनों हाथ से फैलाया। माँ थोड़ा सा विरोध कर रही थी लेकिन उनके विरोध में उनकी हामी साफ दिख रहा थी। इसके बाद ताऊ जी माँ के बुर पर लण्ड सटा कर हलका सा कमर को धक्का लगाया। माँ के मुह से अह्हह्हह्हह्हह की आवाज निकल गई।
मैं समझ गया कि माँ के बुर में ताऊ जी का लण्ड चला गया है। ताऊ जी ने कमर को झटका देना शुरू किया। ताऊ जी जब जब जोर से झटका लगाते थे माँ के मुँह से आआआआआआअहह्हह्हह्हह्ह की आवाज सुनाई पड़ती थी। कुछ देर के बाद जब ताऊ जी ने माँ की चूचियों को मसलना शुरु किया तो उनका जोश और भी बढ़ गया। एक तरफ़ ताऊ जी बुर में जोर से झटके लगाने लगे तो दूसरी तरफ़ माँ के चूचियों को जोर जोर से मसलने लगे।
अब माँ की बुर में लण्ड जब आधे से ज्यादा चला गया तो माँ के मुंह से आआआआआआहह्हह नहीं आआआआआ आह्हह्ह की आवाज आने लगी। ताऊ जी ने माँ के होठों को चूसना शुरु कर दिया। लगभग आधे घण्टे चोदने के बाद ताऊ जी का बीज माँ की चूत में गिरा। माँ भी बहुत ही खुश थी। कुछ देर के बाद ताऊ जी ने लण्ड निकल लिया। माँ पांच मिनट तक लेटी रही।
माँ तब उठ कर जाना चाहती थी। ताऊ जी ने उनको रोक लिया। उन्होने माँ से कहा- कहा जा रही हो?
तब माँ ने कहा- आज के लिये इतना बस !
तब ताऊ जी ने कहा- अभी तो और चुदाई बाकी है, रुक जाओ तुम।
तब ताऊ जी ने माँ के पीछे जा कर माँ की गाण्ड पर लण्ड रखा और कमर को पकड़ कर एक जोरदार झटका मारा। माँ के मुँह से आआआआआ आअह्हह्हहह्हह्हह्हह्ह की आवाज निकलते ही मैं समझ गया कि माँ की गाण्ड में लण्ड चला गया। अब ताऊ जी ने अपनी कमर को हिलाना शुरू किया और कुछ ही देर में पूरा लण्ड को माँ के गाण्ड में घुसा दिया। ताऊ जी माँ के गाण्ड को लगभद दस मिनट तक मारने के बाद जब धीरे धीरे शान्त पड़ गये तो मैं समझ गया कि माँ की गाण्ड में बीज गिर गया है।
ताऊ जी ने लण्ड को निकाल लिया तब माँ के पैर को थोड़ा सा फैला दिया क्योंकि माँ ने दोनों पैरों को पूरा सटा रखा था। ताऊ जी ने माँ की बुर को देखा, माँ से पूछा- पेशाब नहीं करोगी?
माँ ने गरदन हिला कर कहा- नहीं।
अब ताऊ जी ने जैसे ही लण्ड को माँ की बुर के ऊपर सटाया माँ ने अपने दोनो हाथों से अपनी बुर को फैला दिया। ताऊ जी ने लण्ड के अगले भाग को माँ की बुर में डाल दिया और माँ की चूचियों को पकड़ कर एक जोरदार झटके के साथ अपने लण्ड को अन्दर घुसा दिया।
माँ मुँह से आआआह्हफ़्फ़फ़्फ़फ़ईईरीईईई धीईईईईईई आआआआआह्हह्स इस्सस्सस्स स्सस्हह्हह कर रही थी। ताऊ जी पर उनके इस बात का कोई असर नहीं हो रहा था। वो हर चार पांच छोटे झटके के बाद एक जोर का झटका दे रहे थे। उनका लण्ड जब आधे से ज्यादा अन्दर चला गया तो माँ ने ताऊ जी से कहा- अब और अन्दर नहीं डालियेगा वरना मेरी बुर फट जायेगी।
ताऊ जी ने कहा- अभी तो आधा बाहर ही है।
माँ ने यह समझ लिया कि आज उनकी गोरी चूत फटने वाली है। माँ की हर कोशिश को नाकाम करते हुए ताऊ जी माँ के चूत में अपने लण्ड को अन्दर ले जा रहे थे। माँ ने जब देखा कि अब बरदाश्त से बाहर हो रहा है तो उन्होंने ताऊ जी से कहा- मैं आपसे बहुत छोटी हूँ आआआआह्हह्हह्हह््लल्लल्लीईईईईज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़। आआआह्हह। नहीईईई उईआआआअह्ह्हह्हह।
ताऊ जी ने लगातार कई जोरदार झटके मार कर पूरे लण्ड को माँ के बुर में घुसा दिया तथा माँ की चूचियों को मसला। अब माँ को भी मजा आने लगा था। शायद माँ को इसी का इन्तजार था। ताऊ जी ने अपने झांट को माँ की झाँट में पूरी तरह से सटा दिया और इस तरह से उन्होंने पूरे पैंतीस मिनट तक माँ की चुदाई की। इसके बाद माँ और ताऊ जी शान्त पड़ गये तब मैं समझ गया कि माँ की बुर में ताऊ जी का बीज गिर गया है। वो दोनो पूरी तरह से थक चुके थे। अब ताऊ जी ने लण्ड को निकाल दिया और माँ की बगल में लेट गये। फ़िर दोनो ने कपड़े पहने और वहाँ से चलने लगे। तब मैं भी वहाँ से हट गया ताकि उनको पता ना चले कि मैंने सब कुछ देख लिया है। हम तीनों घर वापस आ गये।
ताऊ जी माँ को देख कर मुस्कुराने लगे कि तुम्हारे बेटे को कुछ नहीं पता चला। लेकिन मैंने भी उनको ऐसा ही दिखाया कि मुझे कुछ नहीं पता है।
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गली का लड़का मेरी मॉम की चुदाई करता था
दोस्तो, आज मैं आपको अपनी आँखों देखा हाल एक कहानी के माध्यम से बताने जा रहा हूँ.. जो हकीकत मेरे सामने घटी.. वो मेरी मॉम संगीता की है।
यह बात उस समय की है.. जब मैं बहुत छोटा था। मेरे पापा की शिफ्ट वाली ड्यूटी रहती थी और उनकी अनुपस्थिति में मेरे मोहल्ले का एक भैया आता था.. उसका नाम सपन था। सपन की उम्र उस समय 22 साल की रही होगी और मेरी मॉम संगीता की उम्र उस वक्त लगभग करीब 30 साल की थी।
सपन मेरी मॉम संगीता को चाची कहता था और वो अक्सर हमारे घर में मेरी मॉम संगीता के साथ बात करता रहता था।
एक दिन मैं खेलने के लिए बाहर गया था.. जब शाम को मैं वापस आया तो दरवाजा बंद था। मैंने माँ को आवाज़ दी लेकिन दरवाजा नहीं खुला। करीब 5 मिनट के बाद मेरी मॉम संगीता ने दरवाजा खोला.. तो मैं अन्दर दौड़ते हुए गया और माँ से जल्दी से पानी माँगने लगा।
वो मुझे डांटने लगीं।
मैंने देखा कि सपना भैया बिस्तर में बैठे हैं और अपना पसीना पौंछ रहे हैं। मैंने पानी पिया और वापस बाहर आ गया।
तब मुझे कुछ मालूम नहीं था।
लेकिन एक दिन सपन भैया रात को 8.30 बजे पापा की अनुपस्थिति में आए और साथ में वीसीआर भी साथ लाए, वे बोले- चलो चिंटू आज मूवी देखेंगे।
वो मॉम को चिकन देकर बोले- चाची आज तरीके से चखने का मन है.. तैयार हो और चिकन बना दो।
मेरी मॉम संगीता ने मुस्कुराते हुए उससे चिकन ले लिया और किचन में चली गईं।
सपन ने मूवी वीसीआर में लगा दी और मेरे साथ देखने लगा। थोड़ी देर के बाद मेरी मॉम की 2-3 बार खांसने के आवाज़ आई.. सपन ने मुझसे बोला- चिंटू तुम मूवी देखो.. मैं अभी आता हूँ।
मैं मूवी देखने लगा.. लेकिन मेरे रूम से किचन साफ़-साफ़ देखता था।
सपन ने किचन में जाकर संगीता को पीछे से गले से लगा लिया। मॉम ने उसे हटाते हुए कहा- अरे पागल हो क्या.. अभी नहीं.. चिंटू है।
सपन ने बोला- वो तो मस्ती से मूवी देख रहा है..
अब सपन मॉम की साड़ी उतारने लगा।
मॉम ने साड़ी नीचे करते हुए बोला- अभी नहीं.. बाद में.. अच्छा सुनो.. आप क्या सच में रात को रुकोगे?
सपन ने बोला- हाँ संगीता डार्लिंग, आज की रात हमारी है।
फिर मॉम भी उसके गले लग गईं और उससे किचन से जाने को बोला.. लेकिन सपन कुछ जिद सी कर रहा था।
फिर मॉम ने उससे एक पप्पी दी और वो किचन से एक संगीता को गिलास देने को बोला।
मॉम ने बोला- क्या करोगे?
तो उसने अपनी पॉकेट से दारू की बॉटल निकाल ली। मॉम ने हँसते हुए एक गिलास में कोल्ड ड्रिंक डाल दी। सपन अपने लिए पैग बनाने लगा।
फिर उसने बोला- मेरी जान आज तुम्हें भी थोड़ा पीना पड़ेगा।
मॉम बोलीं- नहीं.. पहले चिंटू को खिला दूँ.. फिर..
सपन ने बोला- संगीता आज सुहागरात मनाना है तुम्हारे साथ।
मॉम ने हँस कर कहा- अच्छा.. तो फिर शादी भी करने पड़ेगी..
और वो खिलखिला कर हँसने लगीं।
सपन बोला- ठीक है..
वो अपना पैग बनाने लगा।
अब सपन एक हाथ में एक कोल्डड्रिंक का गिलास और एक में अपना पैग लेकर मेरे पास आ गया और बोला- चिंटू कोल्ड ड्रिंक कौन पिएगा?
मैंने बोला- मैं..
फिर वो अपना गिलास पीने लगा और मैं कोल्डड्रिंक पीने लगा।
थोड़ी देर में मॉम आकर बोलीं- चलो चिंटू खाना खा लो..
मैं खाना खाने लगा।
सपन अब भी अपना पैग पी रहा था.. खाना खाकर मैं फिर मूवी देखने लगा।
मॉम बोलीं- चिंटू अब सो जाओ।
मैं फिल्म देखने की जिद करने लगा।
फिर मॉम मान गईं.. थोड़ी देर के बाद सपन बोला- चलो अब मैं घर जाता हूँ.. और उसने मेरी मम्मी को पानी लाने को बोला।
मम्मी किचन में गईं.. पीछे से सपन भी गया। मॉम उससे बोलीं- कब तक आओगे?
सपन बोला- बस रानी 2 घन्टे में आता हूँ.. और सुनो सुहागरात की याद रखना..
फिर सपन चला गया।
अब मम्मी और मैं मूवी देखने लगे.. मूवी खत्म होने वाली थी.. तब मैंने सोने का नाटक किया।
थोड़ी देर में ही.. करीब 10.30 दरवाजे पर दस्तक की आवाज आई।
मॉम ने दरवाजा खोला और सपन अन्दर आ गया।
संगीता ने मुझे 2 बार आवाज़ लगाई.. मैं नहीं उठा.. तो वो समझ गईं कि मैं सच में सो गया हूँ.. लेकिन मुझे सब सुनाई और दिखाई दे रहा था।
फिर मॉम ने सपन को खाना दे दिया और बोली- मैं नहा कर आती हूँ।
वो नहाने चली गईं.. करीब 20 मिनट के बाद मॉम नहा कर रेड कलर की साड़ी पहन कर आईं।
सपन तब सिगरेट पी रहा था.. मॉम सपन के पास आईं और उनके हाथ में सिंदूर की डिब्बी थी।
मॉम ने सपन से बोला- तुमने सब कुछ तो किया है मेरे साथ.. आज ये भी कर दो।
सपन ने सिंदूर की डिब्बी हाथ में लेकर मॉम की माँग में सिंदूर भर दिया। सिंदूर लगते ही मॉम सपन से लिपट गईं और बोलीं- आज से मैं आपको अपना पति मानती हूँ।
दोनों एक दूसरे से लिपट कर किस करने लगे।
फिर मॉम ने उससे पूछा- कुछ बचा भी है कि सब ख़त्म?
सपन ने कहा- नहीं मेरी जान.. अभी कैसे खत्म..
वो मॉम के लिए भी एक पैग ले आया.. और दोनों दारू पीने लगे।
सपन ने मॉम को किस किया और उनके दूध दबाने लगा।
मॉम ने बोला- लाइट तो बंद कर दो..
सपन ने लाइट बंद कर दी.. लेकिन किचन की लाइट से मुझसे सब साफ़-साफ़ दिख रहा था।
सपन ने बोला- आजा किसी का डर नहीं है मेरी जान.. आ जाओ।
मॉम उससे लिपट गईं। सपन का हाथ मॉम की कमर को सहलते हुए उनकी गाण्ड को सहला रहा था।
मॉम अभी भी उससे लिपटी हुई थीं।
सपन ने उनका पल्लू गिरा दिया और मेरी मॉम कुछ ही पलों बाद सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में थीं।
सपन ने उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया.. और मॉम का पेटीकोट ‘सरर’ से जमीन में आ गिरा।
मॉम सपन से और चिपक गईं।
अब सपन का हाथ मॉम की गाण्ड को सहला रहा था।
थोड़ी देर के बाद सपन ने मॉम को बोला- लो.. केला मुँह में लो..
पर मॉम नहीं मानी.. वे बोलीं- मुझे घिन आती है..
लेकिन सपन के बार-बार कहने पर वो नीचे बैठ गईं और सपन की पैंट को खोल दिया।
सपन ने जैसे ही अपना अंडरवियर उतारा.. उसका लम्बा और मोटा लौड़ा एकदम भुजंग काला.. झूलता बाहर आ गया।
मॉम ने उसे एक बार देखा और फिर उसे अपने मुँह में ले लिया।
कुछ देर लण्ड चूसने के बाद मॉम ने कहा- बस सपन.. अब डालो अन्दर.. मुझसे नहीं रहा जा रहा..
सपन ने मॉम को बिस्तर पर चित्त लिटाया बगल में मैं सो रहा था। फिर सपन ने पोजीशन में आकर मॉम की चूत में अपना लौड़ा लगा दिया मॉम की एक आह निकली और उन्होंने सपन का लण्ड अपनी चूत में हजम कर लिया।
सपन भी अपने पूरे लौड़े को मॉम की चूत में फिट करने के बाद अन्दर-बाहर करने लगा।
मॉम ने अपनी आँखें बंद कर लीं और उनके मुँह से अजीब सी आवाजें आने लगीं।
सपन मेरी मॉम के दूध को मसले जा रहा था और लगातार चुम्बन कर रहा था।
मॉम बोलीं- सपन एक बार पूरा निकाल कर फिर से डाल दो.. फिर आराम से चोदना।
सपन ने लौड़ा बाहर खींच लिया और मॉम के दोनों पैरों को फैला दिया.. अब वो मॉम के दोनों पैरों के बीच में आ गया.. मॉम ने अपने पैर बहुत ज्यादा फैला लिए थे।
अंधेरे में भी मुझे मॉम की गोरी जांघें दिख रही थीं।
एक मिनट के बाद मॉम की तेज आवाज़ आई- आह जान.. आराम से.. बहुत बड़ा है आपका..
सपन मॉम के ऊपर पूरा चढ़ गया था.. और अपना लौड़ा मॉम की चूत में घुसाने लगा।
अब मॉम के मुँह से मस्ती की आवाजें आने लगीं ‘उम्म्म्म.. आह्ह.. उम्म्म्म..’
करीब 5 मिनट के बाद मॉम बोलीं- मेरा आने वाला है.. जल्दी सपन.. जोर-जोर से।
सपन अपना लौड़ा जल्दी-जल्दी अन्दर-बाहर करने लगा।
कुछ ही धक्कों के मॉम बोलीं- आईईई.. मैं गई..
वो इतना बोल कर सपन से लिपट गईं.. लेकिन सपन अब भी उनको धकापेल चोद रहा था।
एक मिनट के बाद मॉम बोलीं- रूको, मैं ऊपर आती हूँ।
अब सपन मेरे बाजू में लेट गया.. मॉम सपन के लंड के ऊपर अपनी चूत पसार कर बैठ गईं और लण्ड को खा कर मॉम ऊपर-नीचे होने लगीं।
उस टाइम मॉम के चूचे तो जैसे डांस कर रहे थे.. वे बहुत जोर से हिलने लगे थे। सपन ने मॉम के दूध ज़ोर से पकड़ लिए।
करीब 5 मिनट के बाद सपन बोला- रानी अब मेरा भी माल आने वाला है।
मॉम बोलीं- अन्दर मत डालना.. सेफ नहीं है..
फिर कुछ झटकों के बाद सपन उनसे हट गया और खड़ा हो गया.. उसके लंड से माल गिरने लगा।
मॉम अब उठ कर उससे चिपक गईं, दोनों 5 मिनट ऐसे ही लिपटे रहे।
फिर सपन ने बोला- मुझे भूख लगी है.. मॉम बोलीं- अभी कुछ लाती हूँ।
ऐसा कहकर मॉम साड़ी पहनने लगीं.. सपन ने मना किया- अभी कपड़े मत पहनो यार..
फिर मॉम किचन से कुछ खाने का लाईं.. दोनों थोड़ी देर तक ऐसे ही बात करने लगे। फिर से उन दोनों ने एक बार चुदाई की।
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जोक्स
भोजपूरी गीत
"लहंगा उठा दू रिमोट से"
सुनकर
अमेरिका वाले भी
बौखलाए हुए है की
टेक्नोलोजी के मामले मे
हम बिहार से कितना पिछड़े हुए है !!😀
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Girlfriend - कब तक मुझे रोने के लिये अपना "कंधा" देते रहोगे...
Boy- जब तक तुम्हारे दोनो "पैर" मेरे "कंधो" पे नही आ जाते😜😜😜😜
एक बार एक नया शादी शुदा जोड़ा किसी हिल स्टेशन गया, औरत कुछ दूर पैदल चलने के बाद थककर बैठ गयी ।
वहाँ एक गधा बंधा हुआ था जिसका लिंग उत्तेजित अवस्था मे लटक रहाँ था, औरत लिंग को गौर से देखने लगीं ।
तभी वहाँ गाँववाला आया उसने देखा तो सोचा औरत को पहाड़ी पर जाने के लिए गधे की जरूरत है ।
गाँववाले ने गधे की तरफ इशारा कर पूछा मैडम लेना है क्या..?
औरत गधे का लिंग समझ बैठी ।
औरत शर्माते हुए: नहीं-नहीं मै तो ऐसे ही देख रही थी ।
गाँववाला : नि:शुल्क सेवा है ले लो, आपको परेशानी नहीं होगी फटाफट चढ़ जायेगा और उतर भी जायेगा ।
औरत घबराकर : मेरी तो अभी अभी शादी हुई है ।
गाँववाला : इस मे क्या है ये तो आप के लिए ही खड़ा है मैडम, अरे ओ छोटू गधे को इधर लेकर आ...
गधे का हिलता हुआ बड़ा लिंग देख औरत बी.पी. बढ़ गया, वो बोली मुझे माफ कर दो, मुझे नहीं लेना ।
गाँववाला : डरो मत मैडम छोटू तुम्हारे साथ मे रहेगा
फिर छोटू ने जो आकर कहा, औरत को तो अटैक ही आ गया ।
छोटू : आगे के रास्ते मे इसे 3 घंटे लगते हैं, कहो तो गधे को पिछे से चढ़ा दूँ..? 2 घंटे मे नीचे उतर आयेगा
😝😝
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अगर घडी ख़राब हो तो ऐसा किया जाता है क्या
👙For Only Adults Guys👙
😄पत्नी रसोईघर में मैगी नूडल्स
बना रही थी....🍜
पत्नी पति से - सुनते हो क्या तुम
मुझे अभी चोदोगे क्या??
पति बहुत खुश हुआ और फटाफट
चोदने लगा ।
चोदने के बाद पति ने आश्चर्यचकित
होकर पूछा ।
पति -तुमने अचानक मुझे सेक्स के लिए क्यों बुलाया ?
पत्नी - मेरी घड़ी खराब थी कहीं
नूडल्स जल नहीं जाय और मुझे
पता है कि तुम 2 मिनट से ज्यादा
नहीं चोद सकते..!!
बेइज़्ज़ती की हद्द हो गई भेनचोद।
😁😀😄😝😜😜😂😂😂
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भाभी की चूत
चचेरी भाभी का खूबसूरत भोसड़ा
दोस्तो, मेरा नाम जीतू है और मैं मेहसाणा (गुजरात) का रहने वाला हूँ।
इस रसीली कहानी को सुनाने से पूर्व मैं आपको अपने बारे में बता दूँ। मेरी लम्बाई 5’7″ है और मैं एक औसत किस्म का लड़का हूँ.. मेरी उम्र 25 साल है। मेरे लण्ड की लम्बाई 7 इंच है और मोटाई 2 इंच है।
चूत चाटना मेरा सबसे बड़ा शौक है। मुझे लड़कियों और भाभियों की चूत की खुश्बू और उसका स्वाद बहुत पसंद है।
अब आपको ज्यादा इन्तजार न करवाते हुए.. सीधा कहानी पर आता हूँ, यह सत्यघटना है।
बात तकरीबन 6 महीने पहले की है, उस वक्त मेरी मेहसाणा में नई-नई नौकरी लगी थी। मेरा गाँव मेहसाणा से 50 किलोमीटर दूर था और मुझे वहाँ जाने के लिए दो बसें बदलनी पड़ती थीं और रात को घर लौटने में भी देरी हो जाती थी।
मेरा एक चचेरा भाई मेहसाणा में ही रहता था.. तो घर वालों ने मुझे वहीं उनके साथ रहने को भेज दिया।
उनके घर में मेरे अलावा भैया, भाभी अमिता और उनकी एक दस साल की बेटी थी।
भाभी की उम्र करीबन 33 साल की है और वो एक बहुत ही खूबसूरत और कमनीय शरीर की मालकिन है, उनके मम्मे 36 सी साइज के हैं और चूतड़ों का तो पूछो ही मत.. कमाल के गोलाकार और भरे हुए हैं.. जिसे देखते ही जी करता है कि जोर से काट लें।
कोई अगर एक बार उनको साटिन की नाईटवियर में देख ले.. तो मेरा दावा है कि मुठ्ठ मारे बिना नहीं रह सकता।
मैं हमेशा से अपने भाई को किस्मत वाला मानता हूँ कि उनको भगवान ने इतनी खूबसूरत बीवी दी है।
वैसे तो मैं एक शर्मीले किस्म का लड़का हूँ.. तो डर के मारे आज तक किसी भी लड़की को पटा नहीं पाया। उसी तरह मैंने कभी यह सोचा नहीं था कि मैं उनको कभी चोद पाऊँगा.. इसलिए मैं हमेशा की तरह उनके बारे में सोच कर मुठ्ठ मार कर ही काम चला लिया करता था।
पर एक दिन की बात है.. घर में मैं और मेरी भाभी के अलावा कोई नहीं था, मैं वैसे ही पड़ा हुआ एक किताब पढ़ रहा था।
तभी मेरी भाभी मूतने के लिए टॉयलेट में गई और उसी वक्त मुझे भी प्यास लगी तो मैं पानी पीने के लिए खड़ा हुआ।
मेरा फोन टॉयलेट के आगे ही गिर गया।
जैसे ही मैं फ़ोन उठाने के लिए नीचे झुका.. तो मुझे जैसे खजाना दिख गया और वो थी.. मेरी भाभी की चूत।
झुकते ही मेरी नजर टॉयलेट दरवाजे के नीचे की दरार में पड़ी.. जहाँ से मुझे टॉयलेट के अन्दर का नज़ारा दिखाई दिया। मैंने देखा कि भाभी टॉयलेट में मूत रही थीं। मैं धीरे से टॉयलेट के और नजदीक गया और देखने लगा। वहाँ से उनकी चूत साफ़ दिखाई दे रही थी और उनके मूत की धार दिखाई दी जिसे देख कर मैं दंग रह गया।
दोस्तो.. उनकी चूत के बारे में क्या बताऊँ.. पाव रोटी की तरह मस्त फूली हुई और उस पर छोटे-छोटे बाल.. क्या कमाल के लग रहे थे। उनकी चूत के अन्दर के होंठ थोड़े बड़े और थोड़े से बाहर की तरफ को थे.. जो कि मुझे बहुत पसंद हैं। मैं हमेशा ब्लू-फ़िल्मों में ऐसे ही अदाकारा को पसंद करता हूँ.. जिसके अन्दर के होंठ थोड़े बड़े हों।
मेरी भाभी तो एकदम गोरी थीं.. मगर उनकी चूत काली नज़र आ रही थी.. और सच बताऊँ तो मुझे हमेशा से ही काली इंडियन लौंडियों के जैसी हब्सी किस्म की चूतें ही बहुत पसंद हैं।
उनकी चूत देख कर मेरा दिल किया कि अभी जाकर उनकी चूत को मूत के साथ ही चाटने लगूं.. पर इससे पहले कि मैं और कुछ सोचता.. वो मूत कर उठ गईं. और मैं झट से अपनी जगह पर वापस आ कर पढ़ने लगा।
अब मुझे भाभी की चूत के दीदार करने का रास्ता मिल गया था.. तो मैं हमेशा इसी फ़िराक में रहता था कि कब भाभी टॉयलेट जाएं.. और मैं उनकी चूत के दीदार कर सकूँ।
यूं ही 2 से 3 महीने बीत गए।
लेकिन पिछले एक महीने से मैंने नोटिस किया था कि जब वो मूतने टॉयलेट जाती थीं तो मूतने के बाद अपनी चूत को सहलाती थीं और कभी-कभी उंगली भी करती थीं।
चूत को सहलाते हुए.. वो अपनी चूत को इस तरह चौड़ी करती थीं कि मुझे उनकी चूत के अन्दर की गली साफ दिखाई देती थी।
अब तो वो अपनी चूत की सफाई पर कुछ ज्यादा ही ध्यान देने लगी थीं, वो अपनी चूत को हमेशा चिकनी रखती थीं।
उनकी फूली हुई चूत को देख कर ऐसा लगता था कि जैसे वो रोज ही शेविंग करती हों।
मैंने मौका मिलने पर कई बार उनको नहाते वक्त बाथरूम में देखने की कोशिश की.. मगर ज्यादा कामयाबी नहीं मिली। उनकी चूत को देख कर मेरा जी करता था कि अभी दरवाजा तोड़ दूँ और उनकी चूत को खा जाऊँ और इतना चोदूँ कि मेरा लण्ड कभी चूत से बाहर ही ना निकालूँ।
लेकिन डर के मारे कभी हिम्मत नहीं कर पाया।
अब तो कभी-कभी वो टॉयलेट से बाहर आकार यूँ हीं मेरे सामने हँस दिया करती थीं। उनका ये व्यव्हार मेरी कुछ समझ में नहीं आता था और मैंने उस पर ज्यादा सोचा भी नहीं.. मैं तो उनकी चूत देख कर ही खुश था।
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Whatsapp स्टेटस
एक निहायती मादरचोद लड़की का Whatsapp Status:
लण्ड बड़ा होना चाहिए
बाते तो सब बड़ी बड़ी चोदते हैं.😂😂
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ब्लू फिल्मो की विशेषता
ब्लू फिल्में:
सबसे सकारात्मक फिल्म, ना मार-पीट ना खून-खराबा ना लड़ाई-झगडा ना अशांति और ना ही धोखेबाजी...
इसमें भाग लेने वाले चरित्रों के बीच बहुत सारा प्यार और और हमेशा ही बहुत सुखद अंत...
ना मिलना बिछड़ना ना रोना धोना...
बेहतरीन मिलना जुलना...और सहयोगिता..
ना नाटक ना भाषाभेद ना ही ओवर एक्टिंग...
और सबसे अच्छा तो ये है की...
"जहाँ से देखो वहीं से कहानी समझ आ जाती है"
😜😜😜😝😝😝😂😝😂😝
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